
जनक्रांति ब्यूरो
: देश का सबसे बड़ा और ताकतवर संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100 साल पूरे कर चुका है। लेकिन इस शताब्दी वर्ष के मौके पर संघ के भीतर एक ऐसी खलबली मची है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
दशकों पुरानी जिस व्यवस्था के दम पर संघ ने भारत के कोने-कोने में अपनी पैठ बनाई थी, अब उसे जड़ से बदलने का फैसला लिया गया है। *संघ के इतिहास में पहली बार ‘प्रांत प्रचारक’ और ‘क्षेत्र प्रचारक’ जैसे शक्तिशाली पदों को समाप्त किया जा रहा है।* इसकी जगह अब नई और बेहद हाई-टेक व्यवस्था लागू होगी। आखिर क्यों संघ को अपनी संरचना बदलने की जरूरत पड़ी? क्या यह बदलाव 2026-27 के मिशन को ध्यान में रखकर किया गया है? आइए जानते हैं उस ‘मास्टरप्लान’ के बारे में जो संघ के काम करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल देगा और जिसका असर सीधे जमीन से लेकर दिल्ली की सत्ता तक पड़ेगा।
*अब ‘प्रांत’ नहीं ‘संभाग’ संभालेंगे कमान*
संघ की कार्य पद्धति में अब तक ‘प्रांत प्रचारक’ का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता था। लेकिन अब खबर आ रही है कि यह व्यवस्था हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। *नए नियमों के मुताबिक, प्रांतों की जगह अब ‘संभाग प्रचारक’ की व्यवस्था लागू होगी।*
उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में अब तक 6 अलग-अलग प्रांत (मेरठ, ब्रज, अवध, गोरक्ष, काशकानपुर) होते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इसकी जगह दो कमिश्नरी को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा और वहां संभाग प्रचारक नियुक्त होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रचारक का कार्यक्षेत्र छोटा होगा, जिससे वह जमीनी स्तर पर एक-एक कार्यकर्ता और आम जनता तक अपनी पहुंच और समन्वय को और भी ज्यादा मजबूत बना सकेगा।
*खत्म हुई क्षेत्र प्रचारक की कुर्सी*
*आरएसएस की इस नई संरचना में सबसे बड़ा झटका ‘क्षेत्र प्रचारक’ की व्यवस्था को लगा है।* संघ के इतिहास में पहली बार अब ‘राज्य प्रचारक’ का पद सृजित किया जा रहा है। *अब तक क्षेत्र प्रचारक कई प्रांतों और कभी-कभी दो-तीन राज्यों का काम देखते थे, जिससे समन्वय में दिक्कतें आती थीं।अब हर राज्य का एक ही ‘राज्य प्रचारक’ होगा, जो पूरे प्रदेश की कमान संभालेगा।* *जैसे अब तक उत्तर प्रदेश में पूर्वी और पश्चिमी यूपी के लिए अलग-अलग क्षेत्र प्रचारक होते थे, लेकिन अब पूरे यूपी के लिए सिर्फ एक राज्य प्रचारक होगा। इससे पूरे राज्य को एक यूनिट के तौर पर चलाने में मदद मिलेगी और निगरानी तंत्र पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो जाएगा।*
*राजस्थान को लेकर लिया गया ऐतिहासिक फैसला*
इस बड़े बदलाव में राजस्थान को लेकर भी एक चौंकाने वाला फैसला लिया गया है। अब राजस्थान प्रांत को ‘उत्तर क्षेत्र’ का हिस्सा बनाने की तैयारी है। अब तक उत्तर क्षेत्र में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर ही शामिल थे, लेकिन अब राजस्थान भी इसी पावरफुल जोन का हिस्सा होगा। नई व्यवस्था के तहत पूरे देश में कुल 9 क्षेत्र प्रचारक और 75 संभाग प्रचारक होंगे। माना जा रहा है कि मार्च में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी। संघ का यह कदम बताता है कि वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को और भी ज्यादा चुस्त और विकेंद्रीकृत (Decentralized) बना रहा है।
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Source : “Newstrack”
