
। जनक्रांति ब्यूरो
हरिद्वार।उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के योग विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं ख्यातिप्राप्त योग विशेषज्ञ डॉ. कामाख्या कुमार को योग, एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विश्वप्रसिद्ध योग संस्था SVYASA (स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान संस्थान) विश्वविद्यालय, बंगलूरू द्वारा मानद डी.लिट (D.Lit.) की उपाधि से सम्मानित किया गया।ये सम्मान स्वामी विवेकानंद जी की जयन्ती पर आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय की सर्च कमिटी की संस्तुति पर वहाँ के कुलाधिपति डॉ एच आर नागेंद्र द्वारा 23वें दीक्षांत समारोह मे बंगलूरू में प्रदान किया गया।

डॉ. कामाख्या कुमार ने अब तक 100 से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन किया है तथा 17 पुस्तकों का लेखन/संपादन कर योग एवं अकादमिक जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका शोध एवं लेखन कार्य योग, मानव शरीर विज्ञान, चिकित्सा योग, तथा भारतीय दर्शन के विविध आयामों को समाहित करता है, जिससे छात्रों, शोधार्थियों एवं समाज को व्यापक लाभ प्राप्त हुआ है।
इसपर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ कामाख्या ने कहा कि यह एक सपने के सच होने जैसा है । अकादमिक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ उपाधि प्राप्त करना अद्भुत है । इस अवसर पर उन्होंने अपने माता पिता एवं गुरु को स्मरण करते हुए कहा कि यह उपलब्धि मैं अपने परिवार के लिए समर्पित करता हूँ ।
इस समाचार से संस्कृत विश्वविद्यालय में खुशी की लहर है । इस विषय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफसर दिनेश चंद्र शास्त्री ने कहा विश्वविद्यालय के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। कुलसचिव श्री दिनेश कुमार ने कहा कि ये बहुत ही सराहनीय कार्य है ।

इस विषय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह गुरुसत्ता का आशीर्वाद है । गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रोफेसर ईश्वर भारद्वाज ने शुभकामनाएँ एवं बधाई दी है । इसके साथ ही नगर के गणमान्य नागरिकों ने भी इस अवसर पर हर्ष जताया ।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षक साथियों, सहकर्मियों , शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय और राज्य के लिए गर्व का विषय बताया है। यह सम्मान डॉ. कामाख्या कुमार के दीर्घकालीन शैक्षणिक योगदान और योग परंपरा के वैश्विक प्रचार-प्रसार का सशक्त प्रमाण है।
