
जनक्रांति ब्यूरो
बहादराबाद । दीनदयाल उपाध्याय कामधेनु गौशाला समिति दीनदयाल धाम फरह मथुरा की प्रस्तुति भारतीय संस्कृति,गौ संवर्धन एवं सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक मूल्यों पर आधारित चर्चित फिल्म गोदान का आर आर सिनेमा रुड़की में विद्यालयी छात्रों के साथ अवलोकन किया गया।
डॉ कमल किशोर डुकलान ‘सरल’ ने बताया कि बहु चर्चित फिल्म गोदान’ का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति,गौ संरक्षण और पंचगव्य (गाय के उत्पादों) के लाभों के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके साथ ही इस फिल्म में विशेष रूप से हमारी भावी पीढ़ी को उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान बनाम प्राचीन ज्ञान (गाय के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व) को समझना है। गाय केवल पशु नहीं, बल्कि सनातन धर्म का आधार और जीवन के सभी संकटों का समाधान है। फिल्म ‘गोदान’ गौमाता की सेवा, सुरक्षा और उसके प्रति सम्मान के संदेश को मजबूती से आगे बढ़ाने की कोशिश है।
डॉ सरल ने कहा कि वर्तमान समय में आज जिस तरह से हमारी लावारिस गाये सड़कों पर घूमती है,हम उनका संरक्षण व संवर्धन करने के बजाय आज हमारी लाखों गाये आये दिन गौकशी का सिकार हो रही हैं,इस फिल्म में प्रमुख रूप से गौ संरक्षण को बढ़ावा देना व गौ-हत्या पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने का संदेश समाहित है। जिसकी आज नितांत आवश्यकता भी है।

चिकित्सा विज्ञान की आज जिस तरह से बात हो रही है इस डॉ.कमल किशोर डुकलान ‘सरल’ ने कहा कि इसमें पंचगव्य विज्ञान की बात की जाए तो गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर (पंचगव्य) से बने उत्पादों के स्वास्थ्य लाभों (पंचगव्य चिकित्सा) को वैज्ञानिक रूप से इस फिल्म में भावी पीढ़ी को समझाया गया है। हमारी आने वाली पीढी भारतीय संस्कृति में बाल्यकाल से ही गौ माता के महत्व और परम्पराओं को समझें और गौ माता के प्रति जागरूकता का संदेश है।
गोदान फिल्म की कहानी एवं संवादों के दृश्यावलोकन मात्र संदेशपूर्ण मनोरंजन नहीं,बल्कि एक सार्थक फिल्म के माध्यम से परिवार के साथ देखने योग्य शिक्षाप्रद फिल्म निर्माताओं द्वारा संदेश भी देना है। फिल्म के माध्यम से लोगों में संवेदनशीलता जगाना और गाय के प्रति श्रद्धा विकसित कर आम जन का आत्म परिवर्तन करना भी है।
