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जनक्रांति ब्यूरो
देहरादून / नई दिल्ली। हरिद्वार के सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में उठाए गए प्रश्न के लिखित उत्तर के जवाब में केंद्र सरकार ने राज्य में फास्ट ट्रैक न्यायालयों (एफटीसी) एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की स्थिति एवं विस्तार पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने उत्तर में अवगत कराया कि 31 जनवरी 2026 तक उत्तराखंड में 4 फास्ट ट्रैक न्यायालय एवं 4 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय संचालित हैं। ये न्यायालय विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों एवं जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटान के लिए कार्यरत हैं।
उनके द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि न्यायालयों में न्यायाधीशों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति का दायित्व राज्य सरकार एवं संबंधित उच्च न्यायालय का होता है, और इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
न्यायिक प्रक्रिया की सतत निगरानी के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों एवं उच्च न्यायालयों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। साथ ही, पॉक्सो एवं अन्य संवेदनशील मामलों के शीघ्र निपटान हेतु समयबद्ध कार्यवाही पर विशेष बल दिया जा रहा है।
सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सतत प्रयासों का परिणाम है कि राज्य सरकार के अनुरोध पर उत्तराखंड को 3 अतिरिक्त फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय आवंटित किए गए हैं, जो देहरादून (विकासनगर), उधम सिंह नगर (काशीपुर) एवं नैनीताल में स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रदेश में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण में महत्वपूर्ण तेजी आएगी।
इस संबंध में सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में न्याय व्यवस्था को सशक्त एवं त्वरित बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे आमजन, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को शीघ्र न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है।
