औषधीय पौधों, जैविक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों का होगा प्रदर्शन, स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के सान्निध्य में होगा आयोजन

जनक्रांति ब्यूरों
हरिद्वार। पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित मालागांव में चार नवंबर से तीन दिवसीय हर्बल कुंभ का आगाज होगा। हर्बल वर्ल्ड हिमालय (श्री धन्वंतरि धाम) में आयोजित होने वाले जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं धन्वंतरि महोत्सव में देशभर के किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और उद्यमी भाग लेंगे। मेले का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के साथ प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना और औषधीय पौधों की खेती के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित करना है।
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव और कुलपति आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन चार नवंबर को होगा। उद्घाटन समारोह में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और धन सिंह रावत शामिल होंगे। पांच नवंबर को कैबिनेट मंत्री भगत सिंह चौधरी तथा छह नवंबर को समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा मुख्य अतिथि होंगे।
हिमालय से अफ्रीका और चीन तक की वनस्पतियां दिखेंगी
मेले का प्रमुख आकर्षण हिमालय से लेकर अफ्रीका, यूनान और चीन तक की विविध वनस्पतियों तथा पारंपरिक चिकित्सा विरासत का प्रदर्शन होगा। लगभग 200 एकड़ में फैले हर्बल वर्ल्ड हिमालय में औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी।

किसानों को खेती से लेकर मार्केटिंग तक का प्रशिक्षण
तीन दिवसीय मेले में मिट्टी की जांच, मॉडल खेती, मधुमक्खी पालन, कीट विश्लेषण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, डिजिटल कृषि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही कोकोपीट एवं कॉयर उद्योग, गौशाला के स्वावलंबी मॉडल और उच्च मूल्य वाली फसलों का प्रदर्शन होगा।
मेले में पतंजलि किसान डायरी का विमोचन, कृषि मशीनरी एवं उत्पादों की प्रदर्शनी, जल संरक्षण मॉडल, पारंपरिक उत्पादों और व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। किसान मंच, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी के साथ क्रेता-विक्रेता सम्मेलन भी आयोजित होगा।
तीन दिन होंगे प्रशिक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम

चार नवंबर को उद्घाटन के साथ कृषि एवं हर्बल प्रदर्शनी शुरू होगी। शाम को पतंजलि विश्वविद्यालय और माला भजन मंडली की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पांच नवंबर को कृषि प्रसंस्करण, बाजार एकीकरण और उन्नत कृषि तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। शाम को स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगी।
छह नवंबर को धन्वंतरि महोत्सव एवं समापन समारोह होगा। दोपहर एक बजे पुरस्कार वितरण के साथ मेले का समापन किया जाएगा।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि हर्बल वर्ल्ड हिमालय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, औषधीय वनस्पति विरासत और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को समर्पित है। हर्बल कुंभ के माध्यम से इस विरासत को कृषि, विज्ञान, अनुसंधान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
