
जनक्रांति ब्यूरो
हरिद्वार । परीक्षाएं केवल सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में छात्र की अन्तर्निहित शक्तियों को मापने का एक आंकलन हैं। असली सफलता निरंतर सीखने,मेहनत, और अनुभवों से मिलती है। छात्रों को आगे बढ़ने की चाह में प्रदर्शन-संबंधी व्याकुलता दूर करने में सहायता करती है। छात्रों का असली विकास प्रयास,धैर्य और आत्मविश्वास में है,जो क्षमता और बुद्धिमत्ता के लचीलेपन में विश्वास रखता है।….
प्रदेश भर में उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाएं आज से प्रारम्भ हो रही हैं। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में लाखों विद्यार्थी प्रतिभा कर होगे। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी मन की बात कार्यक्रम में परीक्षा पर चर्चा के दौरान छात्रों से परीक्षा के भय से मुक्त रहने वाले जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा पर चर्चा के जरिये देश भर के छात्रों,अभिभावकों और शिक्षकों को एक साथ जोड़कर परीक्षा को तनावमुक्त बनाने का प्रयास किया। देश के प्रधानमंत्री का परीक्षा पे चर्चा छात्रों को ‘परीक्षा योद्धा’ के रूप में निर्मित करने की प्रक्रिया का भाग है। इसका उद्देश्य परीक्षा में अच्छे अंक लाना व बोर्ड परीक्षा की वरीयता सूची में स्थान प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है बल्कि छात्रों को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर अलग-अलग कौशल सीखने,नई गतिविधियों को आजमाने और चुनौतियों को डर के बजाय अवसर में बदलने का अवसर में है।
देश में यह भाव पैदा करना है कि छात्र परीक्षा को एक उत्सव के रूप में मनाएं। देखा जाए तो भारतीय परीक्षा प्रणाली परीक्षाओं में अधिक से अधिक अंक प्राप्त करने की मनोवृत्ति के कारण रटकर याद करने पर अत्यधिक बल देती है। जो कि व्यक्तित्व में एक नकारात्मक प्रथा है, छात्र की रटकर अंक प्राप्त करने की पद्धति जिज्ञासा,आलोचनात्मक सोच और विश्लेषण की हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा काफी हद तक प्रभावित करती है। देशभर में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति हमारे विश्वास को पुन: जागृत कर इन प्रतिगामी समस्याओं को हल करने का एक सार्थक प्रयास है,जो मुख्यत: आलोचनात्मक सोच और सीखने-सिखाने एवं मूल्यांकन के समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है,जो कि परीक्षाओं में कहीं भी दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता है। विद्यालयी शिक्षा में विद्यालय का शत् प्रतिशत परीक्षा परिणाम कैसे आए विद्यालय के सभी बच्चे एनकेन प्रकारेण पास कैसे हो इसी पर ध्यान रहता है।
नई शिक्षा नीति 2020 का समग्र उद्देश्य छात्र की सर्वांगीण और संतुलित व्यक्तित्व का निर्माण कर युवाओं में सोचने की प्रवृत्ति एवं कौशल सीखने को प्रेरित करना है। अमीरी-गरीबी से सभी को परीक्षा के कारण होने वाले तनाव का विभिन्न स्तरों पर सामना करना पड़ता है। व्याकुलता (एंग्जायटी), चिंता,भावुकता और डर जैसे शब्द दुनिया भर में परीक्षाओं अथवा मूल्यांकनों के साथ जुड़कर देखें जाते हैं। एनसीईआरटी के 2022 के एक सर्वेक्षण में 81 प्रतिशत छात्रों ने पढ़ाई, परीक्षा और नतीजों को एंग्जायटी का कारण बताया था। अधिकांश अनुभवजन्य शोधों ने स्कूली उपलब्धि और परीक्षा की व्याकुलता के बीच विपरीत संबंध दिखाया है। इसलिए छात्रों को इससे बचाना जरूरी है। परीक्षाओं को आत्म-अनुशासन के साथ समझना और उसका सुसंगत समाधान भयमुक्त परीक्षा की कुंजी है। डिजिटल सामग्री के प्रसार ने शिक्षार्थियों के लिए विकल्पों की अधिकता पैदा कर दी है। इस कारण परीक्षा के समय छात्रों को भ्रामक सूचना और भ्रांतिपूर्ण जानकारी के बीच अंतर करने में सक्षम होना चाहिए।
हमें रटंत पद्धति से हटकर कौशल-आधारित शिक्षा की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए। कक्षा को जितना रोचक व जीवंत बनाया जा सके,उतना ही अच्छा है,जिसमें शिक्षक प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दें। पाठ्यक्रम को तैयार करने और मूल्यांकन का काम इस तरह किया जाए कि छात्रों में विकासशील मानसिकता को बढ़ावा मिले और वे बौद्धिक बहुलवाद की ओर अग्रसर हों। हमें छात्रों के कल्याण को उच्चतम प्राथमिकता देनी चाहिए,न कि परीक्षा को। स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा एक योग्यता-आधारित दृष्टिकोण प्रदान करती है, जिसमें रटने के बजाय गहन अनुभवात्मक शिक्षा की अवधारणा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। ऐसा होने से शैक्षिक तंत्र पाठ्यक्रम केंद्रित होने के बजाय योग्यता केंद्रित होगा। आगे बढ़ने की चाह छात्रों को प्रदर्शन-संबंधी व्याकुलता दूर करने में सहायता कर सकती है। इसके साथ ही शैक्षिक तंत्र को विद्यार्थियों की क्षमता और बुद्धिमत्ता के लचीलेपन में विश्वास करना चाहिए। परीक्षा छात्रों के आत्मविश्वास में वृद्धि तो करती है, परंतु यह उनकी बुद्धिमत्ता का सटीक मापक नहीं होती। इसलिए हमें उनके जीवन में प्रसन्नता एवं सकारात्मकता के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। सभी छात्रों को हेलेन कीलर के इस वक्तव्य को मंत्र के रूप में याद रखना चाहिए कि ‘आपकी सफलता और प्रसन्नता आपके भीतर है।’ छात्र यह समझें कि परीक्षा जीवन में एक मील का पत्थर हो सकती है, लेकिन यह अंतिम गंतव्य नहीं है।
-रुड़की,हरिद्वार (उत्तराखंड)
