जनक्रांति ब्यूरो:
शताब्दी वर्ष में हर घर जाएगा संघ, हर घर में होगा गण वेशधारी
राष्ट्र के लिए जीने वालों का संगठन हैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
रोहालकी गांव में हुआ संघ का पथ प्रदर्शन और शास्त्र पूजन

बहादराबाद। शताब्दी वर्ष विजय दशमी के पर्व के अवसर पर मंडल बहादराबाद के रोहालकी गांव में शस्त्र पूजन और स्वयं सेवकों द्वारा पथ संचलन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने कहा कि भारत एक देश ही नहींअपितु विश्व को मार्गदर्शन देने वाला देश है।_ हमारे महापुरुषों ने यह सिद्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अंदर जितने जीव है। सबके अंदर आत्म निवास करते है।

भारत की भूमि पर सद्भावना का संदेश देने वाले ऐसे अनेक को उत्सव हमारी सामाजिक धार्मिक संरचना के अंदर जो समाज को समय-समय पर प्रेरणा देकर उसके निराशा दूर करते हुए एक आशा का स्मरण करते है। विजयदशमी विजय का पर्व है ।भगवान राम का प्रसंग विजयदशमी से जुड़ा है और धर्म हमेशा ही जीवन देने का काम करता है। जीवन देने के लिए अधर्म को स्वीकार नहीं करता अन्याय और बुराइयों का मर्दन करता है ।इसलिए धर्म और अधर्म में दो पक्षों के साथ इस विजयदशमी का पर्व है। धर्म की स्थापना के लिए और राम रावण का युद्ध हुआ।उसका अंत करने के लिए भगवान को शक्ति की उपासना करनी पडी ।

उन्होंने कहा कि डॉ हेडगेवार ने देश के तमाम क्रांतिकारियों के साथ एक समय में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उसके साथ काम करते-करते उन्हें लगा हम ठीक दिशा में नहीं जा रहे हैं ।इस देश का युवा अपने प्राणों को क्षण में भारत माता के लिए समर्पित करने के लिए तैयार है ।इस देश के नेता सत्ता लोलुप हो चुके है और इसलिए स्वतंत्रता मिलने के बाद भी देश का भविष्य कैसा होगा इसकी गारंटी नहीं है।।

समाज का जागरण करना पड़ेगा इस देश के लिए जीने का संकल्प जागना पड़ेगा ।देश के लिए मरना बड़ा सरल काम है लेकिन देश के लिए जीना यह बहुत कठिन काम है। जीने के लिए बहुत सारी महत्वाकांक्षाएं, इच्छाएं अपेक्षाएं छोड़नी पड़ती है। बहुत सारा मोह , समर्पण देश धर्म समाज के छोड़ना पड़ता है । डॉक्टर हेडगेवार ने कहा था कि इस सारे काम को संपूर्ण हिंदू समाज करेगा और संपूर्ण हिंदू समाज जिस काम को करेगा वह ईश्वर का काम होगा। समाज की से उन समस्याओं को एक व्यक्ति नहीं कर सकता ठीक इन्हें समाज को जागरूक होना पड़ेगा।

इस समाज का जागरण करने के लिए 1925 में डॉक्टर हेडगेवार ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी , जागृत समाज और देश धर्म के लिए सर्वस्व समर्पण करने वाला अर्थात देश धर्म समाज के लिए जीने वाला संगठन खड़ा किया।। संकल्प पूर्ति के लिए जैसे राम को अयोध्या छोड़नी पड़ी वैसे ही डॉक्टर हेडगेवार ने 1915 में अपना घर को छोडा।मैं अपने लिए नहीं निकला हूं । जिन्हें देश के राजनीतिक सदस्यों और संगठनों के द्वारा संघ का विरोध किया गया।अपनी सत्ता के द्वारा इस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शक्ति से डर कर उसे पर गांधी हत्या का झूठा आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिया है। 1975 में आपातकाल के समय में समाज ने हमें स्वीकार्यक्ति हुई ।

और आज 100 वर्ष पूरे होने के बाद एक केवल भारत में नहीं अपितु तो संपूर्ण दुनिया इस 100 वर्ष की यात्रा पूरी करने के बाद यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को चार विश्वास की दृष्टि से देखना शुरू किया। इसलिए हम सब का सौभाग्य है कि ऐसे श्रेष्ठ संगठन के आज 100 वर्ष पूरे लिए है। उसके 100 वर्ष पूरे होने पर संपूर्ण देश संपूर्ण समाज उसके 100 वर्ष को मनाने के लिए आतुर है।यह हम सब का सौभाग्य है इसलिए हम सब बड़े भाग्यशाली हैं कि भगवान ने अपने इस काम के लिए हमको चुना है।

आज संपूर्ण दुनिया भारत को जिस विश्वास से की दृष्टि से देख रही है । स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि अगर दुनिया को जिंदा रहना है। तो भारत को जिंदा रहना पड़ेगा आध्यात्मिक की जन्मभूमि भारत है ।पर्यावरण को ठीक करने के लिए कि सरकार की जरूरत नहीं है ।किसी संस्था की जरूरत नहीं है। इन परिवार को ठीक करने के लिए मुझे अपना संकल्प जागना पड़ेगा मेरा घर प्लास्टिक रहित होगा मेरे घर के अंदर प्लास्टिक नहीं आएगी ।दूसरा एक छायादार या फलदार पौधा लगेगा । पानी को बचाना है हर घर में 5 साल 10 लीटर पानी प्रतिदिन पीने का हम बचा सकते हैं।तीसरा विषय आज हिंदू समाज जैसे-जैसे इकट्ठा होता दिखाई दे रहा है। दुनिया का विश्वास जैसे बढ़ता है दिखाई दे रहा है

इस हिंदू समाज में इस 100 वर्षों की साधना का जो सफल दिखाई दे रहा है। इस समाज को तोड़ने का प्रारंभ किया जा रहा है ।हमारे महापुरुषों को जातियों में बांटने का काम किया जा रहा है। ।भारत माता की धरती हमारी मां है जब धरती हमारी मां है। दुनिया हमारा परिवार है। 1950 से लेकर आज तक कभी हमने अपने कर्तव्य को जो संविधान ने मुझे अधिकार के शासन कर्तव्य भी दिया कोई आंदोलन धरना प्रदर्शन नहीं देखा ।

भारत उसे परिवर्तन को जीना पड़ेहै चाहिए बार-बार का नाम अधिकांश संख्या पूरा नाम नहीं बता सकते जो सब महापुरुष ने इस यात्रा का प्रारंभ किया जो बट वृक्ष बन गया । कार्य उद्देश्य है हर घर में संघ पहुंचे। इस विषय को अधिकांश से अधिकतम स्वयंसेवक जब तक इस विषय को सुनेंगे नहीं समझेंगे नहीं तब तक उसका अनुसरण नहीं करेंगे इसलिए संघ ने तय किया कि शताब्दी वर्ष में हर घर जाना है हर घर में गण वेशधारी स्वयं सेवक हो सकता है।।तीसरे चरण में हिंदू सम्मेलन करेंगे । कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रधान महेश चौहान ने की।

इस अवसर पर जिला प्रचार प्रमुख जगदीप,विभाग प्रचार प्रमुख अनिल वर्मा,जिला व्यवस्था प्रमुख मुनेश चौहान, खंड कार्यवाह आदित्य चौहान, विभाग सेवा प्रमुख वीर प्रताप,वी8देख आदेश चौहान, योगेश चौहान, पुष्पेंद्र चौहान, अभिषेक चौहान, अमित चौहान, रजनीश चौहान , अंश चौहान, अर्जुन चौहान, उधंम सिंह चौहान, निखिलेश, अरविंद चौहान, राजकुमार चौहान,सचिन चौहान, गौरव चौहान,मयंक चौहान,प्रताप प्रधान, आदेश चौहान, विमांशु, रोहित , चिरंजीव, चंदन,: जिला सह प्रमुख गुरमीत सिंह

