जनक्रांति ब्यूरो

देहरादून/दिल्ली ।सांसद हरिद्वार एवं पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में उत्तराखंड के बाल देखभाल संस्थानों एवं अनाथालयों की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए निरीक्षण व्यवस्था, मानकों के अनुपालन तथा बच्चों की सुरक्षा, पोषण एवं शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
सांसद रावत ने अपने प्रश्न के माध्यम से यह जानना चाहा कि क्या सरकार को उत्तराखंड में बाल देखभाल संस्थानों के निरीक्षण एवं मानकों के अनुपालन को लेकर उठाई गई चिंताओं की जानकारी है, बीते तीन वर्षों में कितनी बार निरीक्षण हुए तथा कितनी संस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। साथ ही उन्होंने पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने हेतु उठाए जा रहे कदमों पर भी जानकारी मांगी।
इस पर महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री बाई ठाकुर ने अपने लिखित उत्तर में अवगत कराया कि *किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015* बच्चों की सुरक्षा, गरिमा एवं कल्याण सुनिश्चित करने का प्रमुख कानून है, जिसका क्रियान्वयन उत्तराखंड सहित सभी राज्यों में किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत राज्य एवं जिला स्तर पर *राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी, बाल कल्याण समितियां (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB) एवं जिला बाल संरक्षण इकाइयों* का गठन किया गया है, जो बाल देखभाल संस्थानों की निगरानी एवं संचालन सुनिश्चित करते हैं। अधिनियम की धारा 54 के तहत निरीक्षण समितियों को नियमित रूप से संस्थानों का दौरा करने का अधिकार प्राप्त है, जबकि जिला मजिस्ट्रेट को इनकी निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु नोडल प्राधिकारी बनाया गया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि *मिशन वात्सल्य* योजना के अंतर्गत देशभर में बाल संरक्षण सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस योजना के तहत बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, परामर्श, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। साथ ही, प्रायोजन, पालक देखभाल, दत्तक ग्रहण एवं पश्चात देखभाल जैसी गैर-संस्थागत सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से *मिशन वात्सल्य पोर्टल* विकसित किया गया है, जिसमें *ट्रैकचाइल्ड, खोया-पाया एवं CARINGS* जैसी सेवाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे बाल संरक्षण प्रणाली अधिक सुदृढ़ एवं तकनीकी रूप से सक्षम बन रही है।
सांसद त्रिवेन्द्र ने इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा एवं समग्र विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर निरीक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय प्रशासन, समाज एवं स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए, जिससे बाल अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
सांसद रावत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के संरक्षण एवं कल्याण हेतु केंद्र सरकार द्वारा मजबूत कानूनी एवं संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है, जो देश के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से उत्तराखंड सहित पूरे देश में बाल देखभाल संस्थानों की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही में निरंतर सुधार होगा।
