
जनक्रांति ब्यूरों
हरिद्वार। उत्तराखंड की आधी आबादी अब सिर्फ योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की नई ताकत बन रही है। केंद्र की DAY-NRLM योजना के तहत प्रदेश में 70,556 महिला स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क तैयार हो चुका है। हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र में अकेले 6,039 समूह महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ रहे हैं।
हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने यह आंकड़ा साझा किया। आंकड़े सामने आने के बाद साफ है कि पहाड़ से मैदान तक महिला समूह अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने की ओर बढ़ रहे हैं।
हरिद्वार में 6,039 समूह, गांवों में नई आर्थिक हलचल
हरिद्वार जिले के 6,039 महिला SHG महिलाओं को आजीविका, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सेवाओं, ऋण और उद्यमिता से जोड़ रहे हैं। सरकार का जोर अब समूहों की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी कमाई और कारोबार का दायरा बढ़ाने पर है।
अब गांव के उत्पाद पहुंचेंगे ऑनलाइन बाजार तक
‘सरस’, ‘सरस आजीविका’ और ‘आजीविका’ ब्रांड के जरिए उत्पादों की मार्केटिंग की जा रही है। ई-सरस, GeM और ONDC के साथ Amazon, Flipkart, Meesho और JioMart जैसे प्लेटफॉर्म पर भी SHG उत्पादों को पहुंचाने की कोशिश हो रही है। यानी गांव की महिला का बनाया उत्पाद अब स्थानीय बाजार से निकलकर देशभर के खरीदारों तक पहुंच सकेगा।
आय में 9.5 फीसदी तक बढ़ोतरी
सरकार के मुताबिक 2025 के स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन में NRLM ब्लॉकों में घरेलू आय में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परिपक्व सामुदायिक संस्थानों के क्लस्टर में आय में 12 से 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी सामने आई।
त्रिवेंद्र का फोकस— उद्यमी बने महिलाएं
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ SHG की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए। हर समूह मजबूत आर्थिक इकाई बने, हर महिला उद्यमी बने और हर गांव स्थानीय रोजगार का केंद्र बने, यही आगे की दिशा होनी चाहिए। उन्होंने कृषि, हस्तशिल्प, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया।
70,556 समूहों का यह नेटवर्क अब आंकड़ा भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नई आर्थिक ताकत बनने की बड़ी संभावना है।
