
हल्द्वानी के दिनेश आर्य पर भरोसा, नरेश बंसल की खाली हो रही सीट पर 16 अक्टूबर को मतदान
जनक्रांति ब्यूरों
देहरादून। उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने अपना पत्ता खोल दिया है। पार्टी ने दर्जाधारी राज्यमंत्री और पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाकर सियासी समीकरणों में नया रंग भर दिया है। हल्द्वानी निवासी आर्य के चयन को भाजपा के दलित कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद भाजपा पर उठे दलित विरोधी सवालों के बीच यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
दिनेश आर्य इस समय राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। वह भाजपा संगठन में जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पार्टी ने उन्हें मैदान में उतारकर दलित प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संदेश दिया है।
25 नवंबर को खत्म होगा नरेश बंसल का कार्यकाल
वर्तमान राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है। इसी सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। भाजपा के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के कारण आर्य की जीत की राह लगभग साफ मानी जा रही है।
भाजपा के पास 47 विधायक, जीत के लिए चाहिए 37
उत्तराखंड विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 19 और अन्य दलों के चार विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट जरूरी हैं। ऐसे में भाजपा के पास जीत के लिए जरूरी आंकड़े से 10 विधायक अधिक हैं। वहीं कांग्रेस के पास अकेले चुनाव जीतने का गणित नहीं है।
राज्यसभा में उत्तराखंड से भाजपा की कल्पना सैनी और महेंद्र भट्ट पहले से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कल्पना सैनी ओबीसी और महेंद्र भट्ट ब्राह्मण चेहरा हैं। अब दिनेश आर्य को मौका देकर भाजपा ने सामाजिक समीकरण में दलित प्रतिनिधित्व को भी प्रमुखता दी है।
