
जनक्रांति ब्यूरो
हरिद्वार। भाजपा के वरिष्ठ नेता व गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी* ने *अर्ध कुंभ को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन अर्ध कुंभ को कुंभ के रूप में प्रचारित कर रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
धार्मिक ग्रंथों में कहीं भी अर्ध कुंभ को कुंभ के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया है। जबकि मेला प्रशासन की डायरी में भी अर्ध कुंभ को कुंभ बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मान भी लिया जाए कि अर्ध कुंभ को कुंभ के रूप में आयोजित किया जा रहा है। तो कुंभ का आयोजन खगोलीय गणना के आधार पर विशेष योग में होता है।
जब सूर्य और बृहस्पति मेष राशि में होते हैं। लेकिन अर्ध कुंभ में ऐसा कौन-सा योग बन रहा है।इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। त्रिपाठी ने कहा कि सरकार का दावा है कि वह हरिद्वार की दिव्यता और भव्यता को ध्यान में रखते हुए अर्ध कुंभ को कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है। लेकिन हरिद्वार की असली दिव्यता हर की पैड़ी पर होने वाली गंगा आरती में देखी जा सकती है। कहा कि हरिद्वार पर्यटन नगरी नहीं बल्कि तीर्थ नगरी है, जहां लोग आस्था के साथ आते हैं।
आज भी देश-विदेश से लाखों हिंदू अपने परिजनों की अस्थियों का विसर्जन करने हरिद्वार आते हैं। कहा कि
विदेशों में भी नदियां हैं।लेकिन लोग वहां नहीं बल्कि हरिद्वार ही आते हैं।क्योंकि इसकी एक वैश्विक धार्मिक पहचान है।
अर्ध कुंभ को कुंभ कह देने से हरिद्वार की पहचान नहीं बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का काम धार्मिक आयोजनों में व्यवस्थाएं करना और भीड़ नियंत्रण करना है। न कि धार्मिक मान्यताओं में बदलाव करना। सरकार को कुंभ क्षेत्र में विकास कार्य कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं के नाम पर केवल करोड़ों रुपये के ढांचे बनाने की बात हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं को कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा।
भाजपा नेता ने कहा कि यदि हरिद्वार को पर्यटन स्थल बनाया गया तो इसका सबसे अधिक नुकसान यहां के पुरोहितों और संत समाज को होगा। क्योंकि पर्यटन और तीर्थाटन में बड़ा अंतर है। पर्यटन मनोरंजन के लिए आता है।
जबकि तीर्थयात्री श्रद्धा और आस्था के साथ हरिद्वार पहुंचता है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सरकार को घेरा
भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक त्रिपाठी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में पीडि़ता के पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग की गई थी। सरकार ने जांच की संस्तुति भी की थी, लेकिन आज तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मामले में एक वीआईपी का नाम भी सामने आया था, जो आज भी सरकार में अहम पद पर है। लेकिन वह पार्टी के कार्यक्रमों में दिखाई नहीं दे रहा है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से अपील की कि धार्मिक मान्यताओं से छेड़छाड़ न की जाए और हरिद्वार की आस्था तथा परंपराओं का सम्मान किया जाए।
