

जनक्रांति ब्यूरों
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में महाशिवरात्रि पर आस्था ने ऐसा रंग दिखाया कि कनखल की गलियां हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठीं। भगवान शिव की ससुराल माने जाने वाले पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हाथों में गंगाजल, दूध और बेलपत्र लिए श्रद्धालु भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए।
भोर से शुरू हुआ भक्तों का पहुंचना लगातार जारी रहा और देखते ही देखते दक्षेश्वर धाम शिवभक्ति के महासंगम में बदल गया। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।

महंत रवींद्र पुरी ने बताया महाशिवरात्रि का महत्व
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि आती है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। उत्तर भारत में कांवड़ परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे महाशिवरात्रि पर गंगाजल और एक बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें तो विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

दक्षेश्वर धाम में दिखी भक्ति की अनूठी तस्वीर
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि कनखल भगवान शिव की ससुराल और राजा दक्ष की राजधानी रही है। दक्षेश्वर महादेव का यह पौराणिक धाम धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रद्धालु ज्योति शर्मा ने कहा कि भोलेनाथ बेहद सरल और दयालु हैं, उन्हें श्रद्धा से चढ़ाया गया जल और बेलपत्र भी प्रिय है। उन्होंने कहा कि दक्षेश्वर महादेव के दरबार में जल चढ़ाने का अलग ही आध्यात्मिक अनुभव है।
महाशिवरात्रि पर दक्षेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हरिद्वार में महादेव के प्रति आस्था सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि करोड़ों शिवभक्तों की गहरी श्रद्धा और विश्वास है।
