
जनक्रांति ब्यूरों
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने संस्कृत को नई तकनीक, शोध और नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल अतीत की धरोहर बनाकर रखने के बजाय डिजिटल दुनिया और आधुनिक शोध से जोड़ना होगा।

शनिवार को आयोजित समारोह में राज्यपाल ने 32 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और छह छात्रों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। लोक गायिका पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल समेत चार विभूतियों को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, भाषा-विज्ञान और डिजिटल तकनीक में संस्कृत के आधार पर शोध की बड़ी संभावनाएं हैं। संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-चेतना, चिंतन परंपरा और सांस्कृतिक स्मृति की वाहक है।

उन्होंने उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों से ज्ञान बढ़ाने, संस्कारों को जीवन में उतारने, समाजसेवा, नवाचार और राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। खास बात यह रही कि राज्यपाल ने समारोह में अपना संबोधन संस्कृत भाषा में दिया

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विश्वविद्यालय में पारंपरिक विषयों के साथ शिक्षा शास्त्र और योग की पढ़ाई संस्कृत माध्यम से होने की बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की कामना की।
