देव संस्कृति विश्वविद्यालय में जुटे देश-दुनिया के एक्सपर्ट, AI से लोकतंत्र को लेकर उठे बड़े सवाल; एआई आधारित पत्रिका समेत कई पुस्तकों का विमोचन

जनक्रांति ब्यूरों
हरिद्वार। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब सिर्फ मोबाइल, चैटबॉट या तकनीक तक सीमित नहीं रहा। सवाल यह है कि जब मशीनें फैसलों को प्रभावित करने लगेंगी तो लोकतंत्र और इंसानी विवेक की भूमिका क्या होगी? इसी सवाल पर मंगलवार को हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने जमकर मंथन किया। ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ अंतरराष्ट्रीय समिट में तकनीक, लोकतंत्र, जनभागीदारी और भविष्य की शासन व्यवस्था पर गंभीर चर्चा हुई।

समापन सत्र में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने साफ कहा कि एआई मानव विवेक का विकल्प नहीं बन सकता। इसका इस्तेमाल जनहित, सुशासन और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से तकनीक से प्रेम करने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया, लेकिन साथ ही चेताया कि तकनीक के साथ नैतिकता और जिम्मेदारी भी जरूरी है।

‘क्या कर सकते हैं’ से आगे सोचें युवा
राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को यह भी सोचना होगा कि किसी तकनीक से क्या किया जा सकता है के साथ-साथ क्या किया जाना चाहिए। एआई का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन, चारधाम यात्रा, भीड़ नियंत्रण और सार्वजनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है।
एआई में पक्षपात बढ़ा सकता है असमानता
उन्होंने कहा कि एआई में किसी भी तरह का पक्षपात समाज में असमानता बढ़ा सकता है। नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में मानवीय जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। न्याय व्यवस्था में भी एआई को सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, अंतिम निर्णयकर्ता के रूप में नहीं।
ओम बिरला बोले- लोकतंत्र के सामने नई चुनौती
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वीडियो संदेश में कहा कि एआई लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने नई संभावनाओं और चुनौतियों दोनों को लेकर आया है। इसका इस्तेमाल पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने में होना चाहिए।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। एआई मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानवीय क्षमता बढ़ाने का माध्यम बने।
वहीं सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष डेक्स हंटर टोरिक ने कहा कि एआई का फायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए सरकार, उद्योग और समुदाय को मिलकर तैयारी करनी होगी।

समिट में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने एआई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी और डिजिटल विश्वसनीयता पर विचार रखे। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान एआई आधारित पत्रिका समेत कई पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
